Sunday, 16 March 2014
Thursday, 27 February 2014
AFTER UGC NET EXAM
gar sab sath hote to ye bat n hoti
na girati meri sakh na ye hasti hairan hoti
khair bas wo sath de deti to ye halat n hoti
ab, jabki bacha khucha bas avsesh hai
bikhra bacha badhal hal hi shesh hai
to koi kya tadpaegi, kyu rulaegi
na bacha hai nau man tel, na radha nach paegi
>>>>>>>>>>>>>>>>-Pradeep Kumar Singh.
gar sab sath hote to ye bat n hoti
na girati meri sakh na ye hasti hairan hoti
khair bas wo sath de deti to ye halat n hoti
ab, jabki bacha khucha bas avsesh hai
bikhra bacha badhal hal hi shesh hai
to koi kya tadpaegi, kyu rulaegi
na bacha hai nau man tel, na radha nach paegi
>>>>>>>>>>>>>>>>-Pradeep Kumar Singh.
Friday, 6 December 2013
कुछ लोग समय को बीत जाने देते हैं . . . क्योंकि
वे आलस्य से ज्यादा समझदार हैं . . .
फिर भी . . . बड़े आलसी हैं।
वे नींद से ज्यादा इंटेलीजेंट हैं . . .
फिर भी . . . अक्सर कहकर सो जाया करते हैं . . .
कि बस ५ मिनट में जग जायेंगे।
वे समय का भरपूर खयाल रखते हैं . . .
फिर भी . . . एग्जाम-टाइम में रातों को सो नही पाते।
वे लोगो से १०० कदम आगे रहते हैं . . .
फिर भी . . . अगला कदम उनके पीछे चलते हैं . . .
इसीलिए . . . कुछलोग जो अपने समय की कद्र नहीं
कर रहे होते . . .
वह भी . . . उपदेश देते हैं . . .
''समय बेशकीमती है।''
Saturday, 5 October 2013
तू है ही प्रदीप
इक बार मेरे अज़ीज़ दोस्त ने पूछा -
क्या हाल-ए-हुजुर है?
मैं बोल पड़ा अफ़सोस मुझे
हाल-ए-दिल बड़ा मजबूर है.
यूँ तो उसकी खातिर मुझमें
प्यार भरा भरपूर है।
फिर भी न जाने क्यूँ …
…. अब भी मुझसे दूर है।
दोस्त कुटिल हो बोल पड़ा-
मेरे दोस्त!
कोई चाँद कहीं तो जरूर है ,
इतना उसे तभी तो गुरूर है,
खैर छोड़ तू उसका ख़याल
क्यूँ उसमें मशगूल है।
अरे!….
…ना तो तुम बिन कोई चाँद है ,
ना ही तुम बिन कोई मगरूर है ,
तू है ही 'प्रदीप'
इसमें उनका क्या कुसूर है।
-प्रदीप।
Thursday, 3 October 2013
जब उनकी सत्ता आएगी
अब दोस्ती की ख्याल-ए-हाल बदल जाएगी
हर हाल में सूरत-ए-हाल बदल जाएगी
कहते हैं जब सत्ता ‘उनकी’ आएगी
‘इन’ तिफ्लों की पूरी चाल ढल जाएगी
क्योंकि,
हर ओर हमीं अब डटे हुए हैं
हमारे पांव इस से उस छोर तक जमे हुए हैं
हमारी आवाज़ इस रव से उस सुर तक लगे हुए हैं
हमारी सोच उस सुर से अब समर तक पहुंचे हुए हैं
क्योंकि हमने हमारे हम नहीं छीने, हमारे गम नहीं बीने
कभी भी तम नहीं कीने, कभी भी सम्म नहीं दीने
हमारी पाक शीरत है हमारी पाक सूरत है
नापाकियों को क्या पता
हमारी पाक खूं और पाक खसलत है.
-जय हिन्द
हर हाल में सूरत-ए-हाल बदल जाएगी
कहते हैं जब सत्ता ‘उनकी’ आएगी
‘इन’ तिफ्लों की पूरी चाल ढल जाएगी
क्योंकि,
हर ओर हमीं अब डटे हुए हैं
हमारे पांव इस से उस छोर तक जमे हुए हैं
हमारी आवाज़ इस रव से उस सुर तक लगे हुए हैं
हमारी सोच उस सुर से अब समर तक पहुंचे हुए हैं
क्योंकि हमने हमारे हम नहीं छीने, हमारे गम नहीं बीने
कभी भी तम नहीं कीने, कभी भी सम्म नहीं दीने
हमारी पाक शीरत है हमारी पाक सूरत है
नापाकियों को क्या पता
हमारी पाक खूं और पाक खसलत है.
-जय हिन्द
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